सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि विलय (Merger) के माध्यम से किरायेदारी के अधिकारों का हस्तांतरण बिना मकान मालिक की सहमति के नहीं किया जा सकता। यह मामला तब सामने आया जब एक बैंक का विलय दूसरे बैंक में होने पर किरायेदारी का अधिकार भी स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि इसके लिए मकान मालिक से अनुमति नहीं ली गई थी। कोर्ट ने इसे रेंट कंट्रोल कानून के तहत ‘अनधिकृत असाइनमेंट’ (Unauthorized Assignment) माना है। इस निर्णय के चलते बैंक को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित परिसर को जनवरी 2027 तक खाली करने का आदेश दिया गया है। साथ ही, बैंक को परिसर का कब्जा खाली करने के लिए एक शपथ पत्र (Undertaking) भी प्रस्तुत करना होगा। यह फैसला रेंट कंट्रोल कानूनों के तहत किरायेदारी हस्तांतरण और कॉर्पोरेट विलय की कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है। Source: Source Post navigation ED चार्जशीट में पंजाब मंत्री संजीव अरोड़ा पर 103 करोड़ के फर्जी आईफोन एक्सपोर्ट घोटाले का आरोप ग्वालियर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिपोर्ट में देरी के कारण डेयरी संचालक पर लगा 1 लाख का जुर्माना रद्द