छत्तीसगढ़ के महान दाऊ कल्याण सिंह के पिता दाऊ शंकर गोपाल सिंह की जमीनों पर आवश्यकताओं के बावजूद एक नए विवाद उपस्थित हुआ है। राजस्व मंडल ने स्पष्ट कि यह वारिस की अवशेषिकता नहीं है। इन गुजरात दक्षिण क्षेत्रों में स्थित जमीनों पर खरीद-बिक्री की भावना अभी भी छूटी नहीं है। इस विवाद में सरकार और यह जमीनों के प्रवासी तथा उप-दल में व्यापक भाषण लगाए गए हैं। इस घटना के बाद, सरकार ने जोर से अधिक आवश्यकताओं की शुल्क चुकाने पर दबाव डालना शुरू किया है। सरकार और सामाजिक गुटों के महत्वपूर्ण अध्यक्ष ने दाऊ कल्याण सिंह की प्रेस की साथ-साथ आदित्य शर्मा, उनकी सह-संबंधित मुख्य के भी बारबत और समझौतों पर चर्चा की है। दाऊ कल्याण सिंह की विशेष अवस्था में इन जमीनों पर खरीद-बिक्री की एक अच्छी कमजोरता और नियमित संवाद हुई। राजस्व मंडल ने इस बात पर कड़ी पहचान ली है कि अब भी वारिस की कोई नहीं है, लेकिन दाऊ कल्याण सिंह के पिता दाऊ शंकर गोपाल सिंह जी की उत्पत्ति से यह वारिस है। दाऊ कल्याण सिंह की इस घटना में, यह बहुत साहब और विभिन्न समाजी श्रेणियों के पास तथा राजस्व मंडल से भी एक अच्छा चर्चा हुआ। इन आवश्यकताओं का दबाव और उनके प्रावधानों की शुल्क चुकाने पर सरकार ने बहुत हद तक फैसला लिया है। 🔗 Read original source — Nai Dunia Raipur Post navigation मनोज अग्रवाल विवाद: बंगाल में ‘निष्पक्ष’ और ‘पक्षपाती’ अफसर कौन? छत्तीसगढ़ में मौसम का डबल अटैक: कुछ हिस्सों में गर्मी, दूसरे हिस्सों में बारिश