भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित ज्ञान भारतम मिशन के तहत, आरंग में प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त की गई हैं। ये पांडुलिपियां 100 साल पुरानी हैं और महत्वपूर्ण संस्कृति विरासत को सहेजने का उद्देश्य से अभी तक प्राप्त नहीं हुईं। आरंग में संचालित ज्ञान भारतम मिशन के तहत, संस्कृति विभाग ने इन पुरानी पांडुलिपियों की प्राप्ति का एक बड़ा महत्वपूर्ण सफलतारम्भ घोषित किया है। ये पुस्तकें 1920-30 के दशक से हस्तलिखित हैं, जिनकी मूल्यवान और अनौपचारिक प्राचीन लेख इतिहास और संस्कृति के विषयों पर हैं। इन पुस्तकों की जानकारी उपलब्ध कराने और सामाजिक अध्ययन के प्रवर्तन के लिए, इन पुस्तकों का विशेष गणना रही है। मिशन के साथ, संस्कृति विभाग ने ये पांडुलिपियां अनुवादित और डिजिटली रूप दिए ताकि उन्हें विश्व की विभिन्न प्रदेशों में लगभग आसानी से डाला जा सके। इन पांडुलिपियों के उपयोग में अनौपचारिक और महत्वपूर्ण प्राचीन लेख पढ़ाने और समाज के हित के लिए इसकी उपयोगिता बढ़ाने की अवसर हैं। यह मिशन भारतीय संस्कृति की प्रेमियों और इन्हें परम्पराओं का सम्बलबुद्धि देने में भी कार्य कर रहा है। ज्ञान भारतम के मिशन ने इन पांडुलिपियों के विस्तार से और आयामित अध्ययन में ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे इतिहास की विषयों के औपचारिक लेखों को भुगतान में उद्घाटन कर सकते हैं। इन पांडुलिपियों का उपयोग अध्ययनकर्ताओं और समाज में भी बढ़ावे के लिए है। आरंग में पांडुलिपियों की प्राप्ति ने भारतीय संस्कृति और इतिहास की विश्वविद्यालय और प्रशासन में एक बड़ा प्रभाव उत्पन्न किया है। 🔗 Read original source — Nai Dunia Raipur Post navigation लखनऊ में योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर कालिदास मार्ग से बैठक खुलाए आरंग में संस्कृति विभाग को 100 साल पुरानी पांडुलिपियां मिलीं