कोलकाता के एक पुरातत्व विभाग ने हाल ही में एक रहस्यमय शिशु के अवशेषों को अंतिम विदाई दी। 1910 के समाचारपत्र में लिपटे इस लड़के की हड्डियों को 2024 में एक पुरानी जमीन की मरम्मत के दौरान खोजा गया था, जिसके बाद कई सालों तक पहचान और विधि-व्यवस्था की जटिल प्रक्रिया चली। प्रारम्भ में शिशु की उम्र लगभग दो साल बताई गई, लेकिन डीएनए परीक्षण और रोशनी-स्पेक्ट्रोस्कोपी ने यह पुष्टि की कि वह 1910 के दशक के शुरुआती वर्ष में मौजूद था। स्थानीय प्रशासन ने शिष्टाचार और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को मद्देनज़र रखते हुए पूरे समारोह को एतिहासिक स्थल पर आयोजित किया। इस घटना ने इतिहास प्रेमियों, मानवशास्त्रियों और सामान्य जन में अतीत के भूले हुए रहस्य के प्रति जिज्ञासा जाग्रत कर दी है, और फिर से याद दिलाया है कि बेतहाशा धूल में भी कभी-कभी अनकहे किस्से छुपे होते हैं। Post navigation अटेनबरो और गोरिल्ला: उनके प्रतीकात्मक टीवी क्षण की कहानी ईरान ने हॉर्मुज़ समझौता पेश किया, परमाणु वार्ता को किनारे पर रखते हुए व्यापक समर्थन की तलाश