इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किन्नर समुदाय से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पारंपरिक रूप से की जाने वाली ‘बधाई’ वसूली के कथित क्षेत्रीय अधिकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया। यह याचिका ट्रांसजेंडर समुदाय के एक सदस्य की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने बधाई संग्रह को पारंपरिक अधिकार के रूप में संरक्षण देने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि केवल परंपरा के आधार पर किसी प्रथा को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रथाएं संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत संरक्षित नहीं की जा सकतीं। न्यायालय ने कानून की सर्वोच्चता पर जोर दिया। फैसले में कहा गया कि सामाजिक परंपराएं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। इस निर्णय को परंपरा और कानून के बीच संतुलन से जुड़े महत्वपूर्ण मामले के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया।

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