इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि निचली अदालत ने ऐसे कानून का बार-बार हवाला दिया, जिसका कानूनी अस्तित्व ही नहीं था। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सारण की पीठ ने मामले में अपील स्वीकार कर ली। हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए फैमिली कोर्ट को वापस भेज दिया। अदालत ने कहा कि न्यायालयों का दायित्व है कि वे सही और प्रभावी कानून के आधार पर फैसले दें। पीठ ने गलत कानूनी प्रावधान के आधार पर आदेश को बनाए रखने से इनकार किया। अदालत ने इस त्रुटि को गंभीर कानूनी चूक माना। मामले में अब दोबारा सभी तथ्यों और लागू कानूनों के आधार पर सुनवाई होगी। फैसले ने न्यायिक प्रक्रिया में सही कानूनी संदर्भ के महत्व को रेखांकित किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालतें गैर-मौजूद कानून के आधार पर निर्णय नहीं दे सकतीं। Source: Source Post navigation छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों पर हाई कोर्ट सख्त, 6967 मौतों के बाद कलेक्टरों से मांगा जवाब दौसा बस ब्लास्ट केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, फांसी की सजा रद्द कर नए ट्रायल का आदेश