मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले में याचिका को लेकर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह झूठा है कि याचिका दायर की गई थी और उसे सूचीबद्ध करने से इनकार किया गया। CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत के सामने कोई रिट याचिका पेश ही नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि केवल एक रिप्रेजेंटेशन यानी पत्र प्राप्त हुआ था। CJI ने सवाल उठाया कि किसी सामान्य प्रतिनिधित्व को रिट याचिका कैसे माना जा सकता है। उन्होंने इस मामले में गलत जानकारी फैलाने पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि तथ्यों को सही तरीके से पेश किया जाना चाहिए। मामले को लेकर उठे विवाद पर CJI ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने संबंधित पक्षों को समय और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि बिना सही प्रक्रिया के किसी दस्तावेज को याचिका नहीं माना जा सकता। Source: Source Post navigation मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ‘बेंच हंटिंग’ मामले में GDA CEO और वकील को अवमानना नोटिस जारी किया तलाक के लिए पत्नी ने मांगे 2 करोड़, हाईकोर्ट ने इसे पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना