उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक मामले में दुष्कर्म के आरोप को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों की मुलाकात एक डेटिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध विकसित हुए। समय के साथ दोनों के रिश्तों में तनाव और मतभेद पैदा हो गए। न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि बाद में संबंध खराब होने मात्र से दुष्कर्म का आरोप स्वतः सिद्ध नहीं होता। फैसले में मामले की परिस्थितियों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया गया। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर संबंधित आरोप को रद्द करने का आदेश दिया। यह निर्णय मामले के तथ्यों और कानूनी पहलुओं के विश्लेषण पर आधारित है। अदालत ने प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके विशिष्ट तथ्यों के आधार पर किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेगी। Source: Source Post navigation गोदावरी जल गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, 27 जुलाई तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट मुंबई विश्वविद्यालय की प्रवेश क्षमता में कटौती और जुर्माने के खिलाफ विधि महाविद्यालयों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया