केरल हाईकोर्ट ने शिक्षा ऋण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि बैंक सह-उधारकर्ता के खराब क्रेडिट स्कोर के आधार पर ऋण आवेदन अस्वीकार कर सकते हैं। न्यायमूर्ति एम.ए. अब्दुल हकीम ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि छात्रों को शिक्षा ऋण पाने का मौलिक अधिकार नहीं है। शिक्षा ऋण योजनाओं का उद्देश्य योग्य छात्रों की मदद करना है, लेकिन बैंकों को तय पात्रता शर्तों का पालन करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि वह बैंकों को निर्धारित नियमों की अनदेखी करने का निर्देश नहीं दे सकता। जब तक संबंधित शर्तों की वैधता को चुनौती नहीं दी जाती, उन्हें लागू माना जाएगा। इस फैसले से शिक्षा ऋण मंजूरी प्रक्रिया में बैंकों की भूमिका स्पष्ट हुई है। अदालत ने ऋण योजनाओं और वित्तीय संस्थानों के नियमों के बीच संतुलन पर जोर दिया। Source: Source Post navigation दिल्ली हाईकोर्ट ने HPV वैक्सीन पर रोक लगाने से किया इनकार, तत्काल नुकसान के पर्याप्त सबूत नहीं जंतर-मंतर प्रदर्शन में पैलेट गन इस्तेमाल मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी