जंगली संघर्षों में जल निकासी, जलाशयों और शुद्धिकरण सुविधाओं को निशाना बनाना अब एक रणनीतिक कदम बन चुका है। युद्धरत पक्ष इन लक्ष्यों को तोड़‑फोड़ कर दुश्मन की सेना को जलरहित कर, उनकी गतिशीलता और मनोबल को कम करने का प्रयास करते हैं। लेकिन इससे नागरिकों को अत्यधिक पानी की कमी का सामना करना पड़ता है, जो स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक उपयोग को सीधे प्रभावित करता है। जल आपूर्ति का विघटन बुनियादी स्वच्छता को बाधित कर रोगों के प्रकोप को बढ़ाता है, तथा खाद्य उत्पादन में गिरावट से भूख और माइग्रेशन की लहरें आती हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून इन अपराधों को प्रतिबंधित करता है, फिर भी कई संगठनों ने इसे मनुष्य द्वारा निर्मित जल संकट के रूप में उजागर किया है। जल बुनियादी ढाँचा सुरक्षित रखने के लिए त्वरित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई, पुनर्स्थापन योजना और सतत जल प्रबंधन आवश्यक है, ताकि युद्ध के बाद भी पानी की मूलभूत जरूरतें पूरी हो सकें। Post navigation सोनीपति में अवैध निर्माण पर SMDA ने चलाया बुलडोजर: नाहरी में 7.5 एकड़ की दो कॉलोनियों को ध्वस्त किया इलेक्ट्रॉनिक इंफ्रास्ट्रक्चर दिग्गज Itron को हैक किया गया