वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ रहा है। राज्यों की बढ़ती बाजार उधारी और कर्ज चुकाने की लागत चिंता का विषय बन रही है। आर्थिक मामलों के विभाग की प्रस्तुति में इन चुनौतियों को रेखांकित किया गया है। बढ़ती सब्सिडी के कारण सरकारी खर्च में लगातार वृद्धि हो रही है। राजस्व खर्च बढ़ने से विकास और उत्पादक निवेश के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हो रहे हैं। राज्यों के सामने वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है। सरकार कोविड-19 के बाद कर्ज के घटते स्तर की दिशा में काम करने का प्रयास कर रही है। वित्तीय जिम्मेदारी और विकास लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना प्राथमिकता है। वैश्विक परिस्थितियां भी राज्यों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, टिकाऊ वित्तीय प्रबंधन के लिए खर्च और कर्ज नियंत्रण जरूरी है। Source: Source Post navigation भारत की पहली स्वदेशी MRI मशीन की कहानी, रतन टाटा और टाटा ट्रस्ट के सहयोग से मिली नई दिशा UPI इस्तेमाल करने पर ग्राहकों को नहीं देना होगा चार्ज, MDR पर वित्त मंत्री ने दी सफाई