दिल्ली हाई कोर्ट ने POCSO मामले में विकाश को बरी कर दिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 20 साल की कठोर कारावास की सजा को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति मधु जैन ने विकाश की अपील को मंजूर किया। ट्रायल कोर्ट ने उसे IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इन धाराओं में 366, 376(2)(n) और 506(II) शामिल थीं। आरोपी को POCSO एक्ट की धारा 5(l) के तहत भी दोषी ठहराया गया था। इस अपराध के लिए POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत सजा दी गई थी। हाई कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट की धारा 29 की वैधानिक धारणा स्वतः लागू नहीं होती। अभियोजन को पहले मामले के मूल और आधारभूत तथ्यों को साबित करना होगा। इन जरूरी तथ्यों के स्थापित होने के बाद ही आरोपी के खिलाफ धारा 29 की धारणा लागू हो सकती है। अदालत के फैसले के बाद विकाश को मामले में राहत मिली है। हाई कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत की दोषसिद्धि को कायम नहीं रखा। Source: Source Post navigation नवजात गायब होने और रिकॉर्ड में हेराफेरी पर पटना हाईकोर्ट सख्त, अस्पताल के दस्तावेजों से छेड़छाड़ पर फटकार