भिवानी जिले का रोहनत गांव 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की दर्दनाक यादों से जुड़ा है। अंग्रेजी शासन के दौरान गांव पर तोपों से हमला किया गया था। उस कार्रवाई में भारी हिंसा हुई और सड़कें खून से लाल हो गई थीं। ग्रामीणों ने स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ विरोध किया था। इस संघर्ष की कीमत गांव के लोगों को लंबे समय तक चुकानी पड़ी। रोहनत की त्रासदी स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक दर्दनाक अध्याय के रूप में दर्ज है। देश को 1947 में आजादी मिलने के बाद भी गांव की ऐतिहासिक पीड़ा की यादें बनी रहीं। आजादी के 71 साल बाद रोहनत में तिरंगा फहराया गया। यह अवसर गांव के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता था। तिरंगा फहराने के साथ स्वतंत्रता संग्राम में गांव के बलिदानों को याद किया गया। इस घटना ने नई पीढ़ी को रोहनत के संघर्ष और देश की आजादी के इतिहास से जोड़ने का काम किया। गांव की कहानी आज भी स्वतंत्रता सेनानियों और आम लोगों के बलिदान की याद दिलाती है। रोहनत का इतिहास देशभक्ति, संघर्ष और त्याग की मिसाल के तौर पर देखा जाता है। Source: Source Post navigation एयर इंडिया टर्बुलेंस मामले में नया दावा, उड़ान के दौरान आधे घंटे सोया था पायलट; यात्रियों से मांगा था लाइटर जब भारत में बनना असंभव माना गया पुर्जा, पंजाब के इंजीनियर ने 1984 में Hero Honda के लिए कर दिखाया कमाल