केरल की उपभोक्ता आयोग ने एक नर्सिंग एजेंसी को सेवा में कमी का दोषी पाया। एजेंसी ने बिस्तर पर पड़ी बुजुर्ग महिला के लिए वैकल्पिक नर्स उपलब्ध नहीं कराई। नर्स की सेवा अचानक बंद होने से महिला की देखभाल प्रभावित हुई। इस स्थिति के कारण मरीज और उसके परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा। आयोग ने मामले में एजेंसी की लापरवाही को गंभीरता से लिया। आयोग ने एजेंसी को सेवा शुल्क का एक हिस्सा वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा पीड़िता को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया। एजेंसी को 4,000 रुपये की राशि रिफंड करनी होगी। उसे 15,000 रुपये का मुआवजा भी देना होगा। कुल मिलाकर एजेंसी पर 19,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश हुआ। मामले में उपभोक्ता सेवा में कमी को आधार बनाकर यह फैसला सुनाया गया। Source: Source Post navigation राजस्थान UCC बिल 2026 को कैबिनेट मंजूरी, लिव-इन संबंधों में नियम तोड़ने पर जेल का प्रावधान भारतीय अदालतों में पारदर्शिता बढ़ाने की मजबूत जरूरत, रिपोर्ट में कई खामियां उजागर