सिंगापुर ने दुनिया का पहला बायोलॉजिकल डेटा सेंटर पेश किया है। इस केंद्र में करीब 1.6 करोड़ जीवित मानव न्यूरॉन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये न्यूरॉन्स 20 कंप्यूटरों को संचालित करने वाली जैविक प्रणाली का हिस्सा हैं। इस पहल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य जीवित न्यूरॉन्स की क्षमताओं का कंप्यूटिंग में इस्तेमाल करना है। जैविक और डिजिटल तकनीक के इस संयोजन से कंप्यूटिंग के नए मॉडल विकसित हो सकते हैं। यह पारंपरिक सिलिकॉन आधारित कंप्यूटिंग से अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। शोधकर्ता मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से प्रेरित तकनीकों पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। इस परियोजना से न्यूरॉन्स की सीखने और अनुकूलन की क्षमता को कंप्यूटिंग में इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। जैविक डेटा सेंटर AI अनुसंधान के लिए नई दिशा खोल सकता है। हालांकि ऐसी तकनीक के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर अभी कई वैज्ञानिक और तकनीकी चुनौतियां हैं। परियोजना को जैविक कंप्यूटिंग के विकास में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।

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