बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक वेतनवृद्धि रोकना मामूली सजा की श्रेणी में आता है। ऐसी सजा के आधार पर किसी कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि मामूली दंड अपने आप में पदोन्नति रोकने का पर्याप्त आधार नहीं है। मामले का संबंध पुलिस विभाग में पदोन्नति के अधिकार से था। अदालत ने कर्मचारी के खिलाफ दी गई सजा और उसके पदोन्नति पर प्रभाव का परीक्षण किया। कोर्ट ने माना कि वेतनवृद्धि रोकने जैसी सजा को पदोन्नति के लिए अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता। फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है जिनकी पदोन्नति मामूली विभागीय दंड के कारण रोकी गई है। हाईकोर्ट ने पदोन्नति के मामलों में दंड की प्रकृति और उसकी गंभीरता को ध्यान में रखने पर जोर दिया। इस निर्णय से पुलिस विभाग में पदोन्नति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन मिलने की संभावना है। Source: Source Post navigation सेल्समैन भर्ती पर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब सरकार से जवाब तलब; नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं पर उठे सवाल ‘आधी रात में निकाला गया’: महुआ मोइत्रा ने नदिया सर्किट हाउस से बेदखली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया