एक बीमा एजेंट ने अपने बैंक खाते में 35 लाख रुपये नकद जमा किए थे। आयकर विभाग ने इस राशि को अस्पष्ट धन करार दिया और इसके स्रोत की जानकारी मांगी। विभाग का कहना था कि कुछ पॉलिसियों में एजेंट का नाम नहीं था। एजेंट ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह पैसा उसका व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि ग्राहकों से बीमा प्रीमियम के रूप में एकत्र किया गया था। मामला आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण यानी आईटीएटी जयपर पहुंचा। ट्रिब्यूनल ने एजेंट को पूरी राहत देते हुए उसके पक्ष में फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने पाया कि एजेंट ने प्रीमियम के रूप में यह राशि जमा की थी और इसे अस्पष्ट धन नहीं माना जा सकता। इस फैसले से बीमा एजेंट को बड़ी राहत मिली है।

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