कई बार लोग असफल होने के डर से कदम आगे नहीं बढ़ाते. वह सोचते हैं कि अगर मैं हार गया तो क्या होगा? रबिंद्रनाथ टैगोर का कहना था कि डरकर किनारे पर बैठे रहने से अच्छा है कि आप कोशिश करें.

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