कई बार लोग असफल होने के डर से कदम आगे नहीं बढ़ाते. वह सोचते हैं कि अगर मैं हार गया तो क्या होगा? रबिंद्रनाथ टैगोर का कहना था कि डरकर किनारे पर बैठे रहने से अच्छा है कि आप कोशिश करें. 🔗 Read original source — Aaj Tak [RAW] Post navigation 4 साल में 7 मुलाकातें… मेलोनी-मोदी की दोस्ती से कैसे बदली भारत-इटली की राजनीति? ATM से निकलें कटे-फटे नोट, जान लें ये सीक्रेट… तुरंत मिलेगा नया!