भास्कर नयूज | दंतेवाड़ा जिले में तीन दशकों से बंद पड़े बांस के सरकारी कूपों को फिर से शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। वन विभाग के मैदानी अमले ने अंदरूनी इलाकों पुरेंगेल, लावा और करका के घने जंगलों के भीतर बड़े बांस कूपों तक रास्ता बनाने और पेड़ों की मार्किंग का काम शुरू कर दिया है। 30 साल तक इन इलाकों में नक्सलियों की अघोषित पहरेदारी और कड़ा दखल था। माओवादियों ने जंगलों में रास्ता बनाने और सरकारी स्तर पर बांस की व्यावसायिक कटाई पर प्रतिबंध जैसा माहौल बना दिया था। यही वजह रही कि दंतेवाड़ा के जंगलों में हर साल हजारों टन कीमती और तैयार बांस समय पर न कटने के कारण जंगलों में ही सड़ते, जलते और पूरी तरह खराब होते रहे। जिले के अरनपुर, पेरपा, तेनेली और बैलाडीला पहाड़ी के पीछे स्थित लावा-पुरेंगेल के वनांचल में उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक बांस का सबसे बड़ा भंडार मौजूद है। पहले इन जंगलों तक सामान्य शासकीय काम के लिए पहुंचना भी जान का जोखिम उठाने जैसा था। नक्सलियों द्वारा रास्तों में लगाए गए प्रेशर आईईडी और लगातार मिलने वाली खूनी धमकियों के कारण वन विभाग का अमला सालों तक यहां मार्किंग करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। : Source Post navigation हिमाचल में ट्रैकिंग कर लौटे बस्तर के युवा पेड़ काट इंद्रावती तक पहले रास्ता, फिर रैंप बनाया, अब यहां हाईवा उतार चुरा रहे रेत