भोपाल: बरकतउल्ला यूनिवर्सीटी में दो दिन चलने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ, जिसमें ‘आंतरिक कल्याण’ को पुनर्वास का मुख्य स्तम्भ बनाकर दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम तय किए गए। सम्मेलन में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और सरकारी अधिकारी एकत्रित हुए और उन्होंने शारीरिक उपचार के साथ-साथ आत्म‑विश्वास, आत्म‑स्वीकृति और सामाजिक समावेशन पर जोर दिया। प्रमुख वक्ता डॉ. रेखा सिंह ने कहा, “पुनर्वास केवल शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा और आत्मविश्वास का होना चाहिए”। कार्यशालाओं में मनोवैज्ञानिक सहायता, योग, कला थैरेपी और डिजिटल स्किल्स प्रशिक्षण को प्रमुख बनाया गया। सरकार ने विशेष छूट, रोजगार के अवसर और सुलभ बुनियादी ढाँचा बनाने की प्रतिबद्धता जताई। कनिष्ठ डॉ. अजय वर्मा ने कहा, “आंतरिक कल्याण से ही दिव्यांगों की आत्मनिर्भरता संभव है,” और भविष्य में ऐसे मंचों को जारी रखने की अपील की। Post navigation “मैं एक जीवन बचाने की कोशिश कर रहा था”- गोल्डर्स ग्रीन हमले में हस्तक्षेप करने वाले व्यक्ति ने बीबीसी को बताया बांग्लादेश में बढ़ा आतंकवादी खतरा, सरकार ने देशव्यापी अलर्ट जारी किया, तलाशी अभियान तेज