भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने महाराष्ट्र में क्षतिपूरक वनीकरण योजना को लेकर गंभीर कमियां सामने रखी हैं। रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। CAG ने कई मामलों में नियमों के पालन में कमी की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वनीकरण कार्यों की गुणवत्ता और प्रभावी निगरानी में खामियां पाई गईं। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना में बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता बताई गई है। CAG ने संबंधित विभागों को सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है। रिपोर्ट में धन के उपयोग और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा पर जोर दिया गया है। अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा गया है। क्षतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई करना है। इस रिपोर्ट के बाद राज्य में पर्यावरणीय योजनाओं के संचालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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