Global market crisis में India’s share market भी नकारात्मक परिणाम दे दिया है। Iran-American tension और crude oil prices में उछाल के संयोजन में Sensex और Nifty दो वार बड़ी गिरावट ने share market पर प्रभाव पड़ा। इसके फलस्वरूप, निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये डूब गए। जबकि ₹ निचले record स्तर पर पहुंच गया, IT stocks में सबसे अधिक बिकवाली रही है। इन्हीं कारकों के कारण experts मानते हैं कि Middle East crisis का चलना long-term market volatility का प्रभाव पड़ सकता है।

इस event का उपरोक्त context में, अब जो भी Middle Eastern situation changes के संदर्भ में, market में किसी न किसी extent तक वैकल्पिक volatility होना लगातार इंसाब रहा है। Sensex और Nifty दोनों 11 जुलाई को दोनों sides पर गिरावट की शिकायतें दे रहे थे, सबसे तेजी से IT stocks में।

Sensex और Nifty में इनकारों का उपयुक्त response एक्सपर्ट्स ने बताया है। उन्होंने मान्यता दी कि ऐसे विषयों पर ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि ये market volatility के स्तर पर फ़िल्टर दे सकते हैं।

Sensex और Nifty में इनकारों के result में, market participants नए risk management strategies लगा रहे हैं जिसमें diversification और portfolio rebalancing स्थापन की कोशिश आई है।

कुछ experts मानते हैं कि अगले months तक market situation भावनात्मक रहेगा, लेकिन long-term prospects और investments बदलने की संभावना नहीं है।

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