UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को तेज और आसान बना दिया है। अब इसके अगले चरण में सुरक्षा और भरोसा सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन फ्रॉड के खतरे भी बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक केवल तेज भुगतान व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी। यूजर्स के लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीकों की जरूरत होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फ्रॉड के संदिग्ध पैटर्न पहचानने में मदद कर सकता है। बिहेवियरल एनालिटिक्स से यूजर के सामान्य लेनदेन व्यवहार में असामान्य बदलाव पकड़े जा सकते हैं। डिवाइस इंटेलिजेंस संदिग्ध डिवाइस और गतिविधियों की पहचान करने में उपयोगी हो सकता है। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन भुगतान की सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत दे सकता है। इन तकनीकों के इस्तेमाल से संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के UPI इकोसिस्टम में सुरक्षा और भरोसा इसकी सफलता के अहम आधार होंगे। तकनीक के साथ यूजर्स में डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी होगा।

Source: Source