आईबीएम के शेयर 14 जुलाई को 25 प्रतिशत तक गिर गए, जो कंपनी के 115 साल के इतिहास की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट रही। इस गिरावट की प्रमुख वजह मेनफ्रेम कारोबार से होने वाली आय में 42 प्रतिशत की कमी रही। कंपनी के सीईओ अरविंद कृष्णा ने कहा कि सॉफ्टवेयर कारोबार में आई कमी स्थायी नहीं है। उनके अनुसार यह मांग में गिरावट नहीं, बल्कि सौदों के पूरा होने में हुई देरी का असर है। उन्होंने बताया कि टले हुए लगभग एक-तिहाई सौदे तीन सप्ताह के भीतर पूरे हो गए। आईबीएम ने वर्ष 2026 के लिए अपनी विकास दर का अनुमान घटा दिया है। इसके बावजूद कंपनी भविष्य की तकनीकों पर बड़े निवेश की रणनीति पर कायम है। आईबीएम लाइटवेल परियोजना में 5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। साथ ही क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश जारी रखेगी। कंपनी का मानना है कि दीर्घकाल में ये निवेश उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति को मजबूत करेंगे। अरविंद कृष्णा ने निवेशकों से अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक संभावनाओं पर ध्यान देने की अपील की। Source: Source Post navigation जीप मेरिडियन 85वीं एनिवर्सरी एडिशन लॉन्च, सिर्फ 85 यूनिट्स होंगी उपलब्ध ऑफिस के अंदर स्कूटर चलाते दिखे नोब्रोकर के सीईओ, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल