दिल्ली की एक अदालत ने गुजरात पुलिस के चार अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी। अधिकारियों पर एक नाबालिग बच्चे को कथित तौर पर पिता को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप था। अदालत ने उनकी कार्रवाई की तुलना औपनिवेशिक शासन के दौर के तौर-तरीकों से की। अदालत के अनुसार पुलिसकर्मियों के पास बच्चे को दूसरे राज्य में ले जाने का कोई कानूनी आधार नहीं था। मामले में नाबालिग को कथित तौर पर एक तरह के ‘चारे’ के रूप में इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपहरण के आरोपों को बरकरार रखा। चारों अधिकारियों ने अपने खिलाफ कार्रवाई को चुनौती दी थी। अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। फैसले में पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता पर गंभीर सवाल उठाए गए। अदालत ने माना कि बच्चे को राज्य की सीमा पार ले जाने के लिए आवश्यक कानूनी अधिकार मौजूद नहीं था। यह मामला पुलिस की शक्तियों के इस्तेमाल और नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। अदालत के फैसले से आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। Source: Source Post navigation पत्नी-बेटी को हर महीने ₹18 हजार गुजारा भत्ता, बकाया वसूली के लिए J&K हाईकोर्ट ने संपत्ति कुर्की का आदेश दिया जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में क्यों थे? दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कारण