कर्नाटक हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी डॉक्टर की बहाली को रद्द कर दिया है। अदालत ने जांच पूरी होने तक डॉक्टर के निलंबन को फिर से लागू रखने का आदेश दिया। यह मामला दो छात्राओं द्वारा डॉक्टर के खिलाफ की गई शिकायतों से जुड़ा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय आरोपी डॉक्टर का बचाव किया। हाईकोर्ट ने SIMS के निदेशक और प्रमुख सचिव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। अदालत ने आरोपी डॉक्टर को जांच पूरी होने तक पद पर बनाए रखने के फैसले को उचित नहीं माना। कोर्ट ने मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही पर जोर दिया। यदि डॉक्टर दोषी पाया जाता है तो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग उसका लाइसेंस रद्द करने पर विचार कर सकता है। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। Source: Source Post navigation NEET-UG पेपर लीक मामले में आरोपियों की पॉलीग्राफ टेस्ट याचिका पर दिल्ली कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा