बालोद के बुधवारी बाजार में एक छोटे से ठेले ने धनंजय की पहचान बनाई है। वह हर बुधवार और रविवार को बाजार में अपना ठेला लगाते हैं। इस ठेले पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खाद्य पदार्थ मिलते हैं। घर में तैयार किए गए चना, मुर्रा, चिप्स और मिक्चर ग्राहकों को खूब पसंद आते हैं। धनंजय ने कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर अपने पिता का ठेला संभालने का फैसला किया। उन्होंने पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत शुरू की। धीरे-धीरे उनके ठेले पर ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। स्थानीय लोगों के बीच उनके पारंपरिक स्वाद वाले उत्पाद लोकप्रिय हो गए। कारोबार बढ़ने के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ी। अब वह एक दिन में करीब 7 से 8 हजार रुपये तक कमाने लगे हैं। उनकी कहानी पारंपरिक कारोबार और मेहनत से सफलता हासिल करने की मिसाल पेश करती है। धनंजय ने पिता के काम को संभालकर उसे अपनी कमाई का मजबूत जरिया बनाया।

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