GIFT City के दूसरी पीढ़ी के नियमों से नियामकीय व्यवस्था में बदलाव के संकेत मिलते हैं। नियामक अब केवल निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने वाली भूमिका तक सीमित नहीं दिखता। उसकी भूमिका एक सक्रिय पर्यवेक्षक और निगरानीकर्ता के रूप में विकसित हो रही है। यह बदलाव नियामकीय व्यवस्था के परिपक्व होने को दर्शाता है। नए नियमों ने कई तकनीकी और संचालन संबंधी मुद्दों को संबोधित किया है। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। अब प्रमुख कमियां तकनीकी नहीं बल्कि वैधानिक प्रकृति की हैं। मौजूदा कानूनों और अधिकारों के दायरे में कुछ सीमाएं प्रभावी नियमन को प्रभावित कर सकती हैं। GIFT City के विकास के अगले चरण के लिए स्पष्ट वैधानिक ढांचा जरूरी होगा। नियामक की जिम्मेदारियों और शक्तियों को कानून में और स्पष्ट करने की आवश्यकता है। इससे निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत हो सकती है। GIFT City की दीर्घकालिक सफलता अब तकनीकी सुधारों के साथ वैधानिक बदलावों पर भी निर्भर करेगी। Source: Source Post navigation OpenAI की CFO Sarah Friar ने कर्मचारियों से कहा- Anthropic की चिंता न करें, 2027 में IPO का संकेत कॉलेज छोड़ा, पिता का ठेला संभाला और बदली किस्मत, अब रोज कमाते हैं ₹7-8 हजार