राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई जानकारी देने में लापरवाही और देरी बरतने के मामले में गुरुग्राम के दो राजस्व अधिकारियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। संबंधित सक्षम प्राधिकारी को इन अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता हरेंद्र ढींगड़ा का कहना है कि आयोग ने एक अन्य आरटीआई आवेदन से जुड़ी शिकायत में पहले ही इन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और धारा 20(2) के तहत उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध न कराने को आयोग ने गंभीरता से लिया। राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के तहत वैधानिक शर्तों को पूरा पाते हुए तत्कालीन अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया। आयोग ने साल 2024 में शो कॉज नोटिस संख्या 1464 और 1468 पर फैसला सुनाते हुए तहसीलदार दर्पण कंबोज और नायब तहसीलदार सुशील कुमार पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना किया है। ये दोनों अधिकारी 7 नवंबर 2022 को दाखिल किए गए आरटीआई आवेदन के समय राज्य लोक सूचना अधिकारी का प्रभार संभाल रहे थे और मामले से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जुर्माने की राशि आदेश मिलने के तीन महीने के भीतर आयोग के निर्दिष्ट हेड के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से पंचकूला में जमा करानी होगी। आयोग सचिवालय को इस आदेश की प्रति गुरुग्राम के उपायुक्त को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि संबंधित अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, तो कानून के अनुसार यह जुर्माना राशि उनकी पेंशन से वसूल की जाए। आदेश के तहत उच्च अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे जांच करें कि सूचना देने में देरी किन परिस्थितियों की वजह से हुई और दोषियों के खिलाफ बिना देरी के उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इस कार्रवाई की रिपोर्ट अगले तीन महीनों के भीतर राज्य सूचना आयोग को सौंपनी होगी।

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