छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के केकतीटोला गांव की महिला किसान करौंदा परतेती ने एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और कम आय के बीच पारंपरिक खेती करने वाली करौंदा ने आधुनिक तकनीकों की मदद से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की। उन्हें राजनांदगांव के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और संबंधित सरकारी विभागों से तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिला। इसके बाद उन्होंने करीब 15 एकड़ जमीन पर एकीकृत कृषि प्रणाली का मॉडल विकसित किया। इस मॉडल में ड्रिप सिंचाई के जरिए सब्जियों की आधुनिक खेती और फलों के बागान शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने बकरी, सुअर, गाय और मुर्गी पालन को भी कृषि गतिविधियों से जोड़ा। मछली पालन को शामिल करके उन्होंने अपनी आय के कई स्रोत तैयार किए। इन प्रयासों से उनकी सालाना आय 2024-25 में 35.48 लाख रुपये से बढ़कर 2025-26 में 42.30 लाख रुपये हो गई। इस तरह उनकी वार्षिक आय में 6.82 लाख रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खेती के इस मॉडल से उनके परिवार की खाद्य और पोषण सुरक्षा में भी सुधार हुआ है। विविध कृषि गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन और बाजार के उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिमों का सामना करने की क्षमता बढ़ी है। उनके प्रयासों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। अब उनके काम का प्रभाव आसपास के 8 से 10 गांवों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) तक पहुंच रहा है। करौंदा परतेती की सफलता अन्य आदिवासी महिलाओं और किसानों को टिकाऊ तथा विविधतापूर्ण खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। Source: Source Post navigation हल्की चोट या मामूली गिरने पर भी टूट जाती है हड्डी? डॉक्टर ने बताया इसके पीछे कौन-सी बीमारी हो सकती है हिमाचल के शक्तिपीठों में महानवमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, 8 दिनों में 5.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन