भारत के डीआरडीओ की गैस टर्बाइन अनुसंधान स्थापना (GTRE) ने 350 किलोग्राम थ्रस्ट वाला नया एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन विकसित किया है। यह इंजन आधुनिक युद्ध प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसका उपयोग क्रूज़ मिसाइलों को शक्ति प्रदान करने में किया जा सकेगा। यह हाई-स्पीड टारगेट ड्रोन के संचालन में भी अहम भूमिका निभाएगा। नई तकनीक भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगी। इससे महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी। यह विकास ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण को बढ़ावा देता है। स्वदेशी इंजन भविष्य की उन्नत सैन्य प्रणालियों के विकास में भी सहायक होगा। इससे भारतीय रक्षा अनुसंधान को नई तकनीकी बढ़त मिलने की उम्मीद है। यह उपलब्धि देश की रणनीतिक स्वायत्तता को और सुदृढ़ करेगी। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार को इससे नई गति मिलेगी। Source: Source Post navigation नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद, राजधानी के 18 स्टेशनों पर सुरक्षा कारणों से प्रवेश-निकास रोका गया पेपर लीक विरोध में सिरसा में प्रदर्शन, किसान-छात्र संगठनों और इनेलो ने उठाई न्याय की मांग