भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर बंद हुआ। रुपया 14 पैसे गिरकर 95.22 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से रुपये पर दबाव बना रहा। विदेशी फंड की निकासी ने भी घरेलू मुद्रा की कमजोरी बढ़ाई। हालांकि कच्चे तेल की नरम कीमतों से रुपये को कुछ राहत मिली। बाजार में वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर देखने को मिला। निवेशकों ने डॉलर की मांग और विदेशी पूंजी प्रवाह पर नजर बनाए रखी। मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच रुपया सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। विशेषज्ञों के अनुसार आगे भी वैश्विक परिस्थितियां रुपये की दिशा तय करेंगी। भारतीय बाजार में विदेशी निवेश गतिविधियां भी अहम भूमिका निभाएंगी। Source: Source Post navigation मालेरकोटला फीस रेगुलेटरी बॉडी में निसार अहमद थिंद नियुक्त, निजी स्कूलों की फीस मनमानी पर होगी निगरानी भावना कंठ बनीं पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर, भारतीय वायुसेना में रचा नया इतिहास