तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच लंबे समय से राजनीतिक संघर्ष रहा है। राज्य की सियासत में नेताओं की गिरफ्तारी कई बार बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी रही है। उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी के बाद पुराने राजनीतिक विवादों की चर्चा फिर शुरू हो गई है। इससे पहले करुणानिधि की गिरफ्तारी ने भी तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा असर डाला था। जयललिता और डीएमके के बीच टकराव के दौर में गिरफ्तारी की घटनाएं सुर्खियों में रही थीं। राज्य की राजनीति में सत्ता संघर्ष और विरोधी दलों के बीच तीखे मतभेद देखने को मिलते रहे हैं। हाल के वर्षों में नई राजनीतिक ताकतों के आने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। टीवीके नेता और अभिनेता से नेता बने विजय भी राज्य की राजनीतिक हलचल का हिस्सा बन चुके हैं। उदयनिधि मामले ने एक बार फिर तमिलनाडु में राजनीतिक कार्रवाई और उसके प्रभाव पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में गिरफ्तारी की घटनाएं अक्सर राजनीतिक संदेशों से जोड़ी जाती रही हैं। तमिलनाडु की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। Source: Source Post navigation ईंधन की गुणवत्ता पर उठे सवालों को सरकार ने किया खारिज, जांच जारी रहने का दावा