इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का बायो-इंक्यूबेशन सेंटर चार साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2022 में करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी। इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। निर्माण में देरी के कारण परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 26 करोड़ रुपये हो गई है। देरी के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं की गई है। परियोजना की टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि काम एक कंपनी को मिला, लेकिन भुगतान दूसरी कंपनी के नाम पर किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है। इसी तरह विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन भी समय पर पूरा नहीं हो सका है। प्रशासनिक भवन को पूरा करने के लिए अब करीब 7 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने की संभावना है। बायो-इंक्यूबेशन सेंटर में एग्री बायोटेक, हेल्थकेयर बायोटेक, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित स्टार्टअप को सुविधाएं देने की योजना है। विश्वविद्यालय का कहना है कि सेंटर का निर्माण जल्द पूरा कर इसे शुरू किया जाएगा। Source: Source Post navigation मुंबई यूनिवर्सिटी से संबद्ध प्रवीण गांधी लॉ कॉलेज को मिला स्वायत्त दर्जा