शहर में पुलिस की नाक के नीचे, एसीपी दफ्तर और पुलिस चौकियों से महज कुछ कदमों की दूरी पर प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न और हूटरों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। नियमों की अनदेखी कर बाजारों में प्रेशर हॉर्न, हूटर और वाहनों पर काली फिल्मों का इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है। तेज आवाज वाले ये हॉर्न न केवल ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए बड़े हादसों का कारण भी बन रहे हैं। ईएनटी विशेषज्ञों के अनुसार, ये हॉर्न 100 डेसिबल से अधिक शोर पैदा करते हैं, जो बुजुर्गों और दिल के मरीजों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। दैनिक भास्कर की टीम द्वारा की गई पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि विभिन्न बाजारों में दुकानदार बेखौफ होकर ये अवैध उपकरण बेच रहे हैं और मौके पर ही इंस्टॉल भी कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि वे बिना किसी डर के ग्राहकों को हॉर्न बेचते हैं और पुलिस की कार्रवाई का उन्हें कोई भय नहीं है। हालांकि, पूर्व एसीपी का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के तहत ऐसे हॉर्न पूरी तरह प्रतिबंधित हैं और इनके उपयोग पर वाहन सीज करने व भारी जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस के सामने से बसें और वाहन ये हॉर्न बजाते हुए निकल जाते हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन की उदासीनता के कारण शहर में ध्वनि प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है।

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