राजस्थान के बामनवास‑टोडाभीम इलाके में 30 किमी लंबी मेगा हाईवे का काम 2020 में शुरू हुआ, लेकिन तीन साल बीत चुके हैं और पक्की सड़क अभी भी धूल‑भरी कच्ची पथरी पर है। कुल अनुमानित लागत लगभग ₹100 करोड़ थी, पर जमीन अधिग्रहण, राजस्व आवंटन में देरी और ठेकेदार के बीच अव्यवस्था ने गति को रोक दिया।

स्थानीय लोग रोज़ाना धूल‑भरे रास्ते पर चलते‑फिरते थक रहे हैं, जबकि कई बसें और ट्रकों को बिखरी हुई अस्थायी पक्की सड़कों से गुजरना पड़ता है। मौसम‑से जुड़े नुकसानों के कारण काम और भी देर से हो रहा है, और विभागीय रिपोर्टें यह दर्शाती हैं कि अभी तक 30 % ही कार्य पूरा हुआ है।

राज्य सरकार ने दो बार गति बढ़ाने का वादा किया, लेकिन स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी। अगर जलडтона, उचित फंडिंग और तेज़ भूमि समाधान नहीं हुआ तो इस 100 करोड़ के प्रोजेक्ट का पूर्णता 2025‑26 तक टाल सकता है।