महासमुंद जिले में धान खरीदी सीजन 2025-26 के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहां 54 सरकारी केंद्रों से लगभग 18 करोड़ रुपए मूल्य का धान गायब पाया गया है। भौतिक सत्यापन के दौरान पता चला कि रिकॉर्ड में स्टॉक मौजूद है, लेकिन केंद्रों के फड़ पूरी तरह खाली हैं। प्रशासन ने अब तक केवल आरंगी और बम्हनी सहकारी समितियों के प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जबकि 52 अन्य संदिग्ध केंद्र प्रभारियों पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। घोटाले की जद में आए प्रमुख केंद्रों में तोषगांव (85.58 लाख), बढ़ईपाली (66.88 लाख), मोंगरापाली (60.52 लाख), और सम्हर सहित कई अन्य सहकारी समितियां शामिल हैं। इस मामले ने जिला प्रशासन की निगरानी प्रणाली और नोडल अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरायपाली के तहसीलदार श्रीधर पंडा के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, हालांकि कुछ केंद्रों की रिपोर्ट अभी भी लंबित है। इस प्रशासनिक लापरवाही और संभावित मिलीभगत से सहकारी समितियों को भारी वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। Source: Source Post navigation चंडीगढ़ में तेज रफ्तार कार ने महिला कांस्टेबल को मारी टक्कर, पुलिस ने लुधियाना नंबर की कार की पहचान की रायपुर की फैक्ट्री में भीषण विस्फोट: ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से 3 की मौत, बाल श्रम का मामला आया सामने