बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से समाज की रूढ़ियों को चुनौती देने वाली प्रेरणादायक खबर सामने आई है। तीन बहनों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार कर एक नई मिसाल पेश की। उन्होंने सामाजिक परंपराओं और पाटीदारों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए पिता को मुखाग्नि दी। इस कदम के जरिए उन्होंने बेटियों के अधिकार और समानता का संदेश दिया। परिवार के इस फैसले की क्षेत्र में चर्चा हो रही है। आमतौर पर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी बेटों से जोड़ी जाती है, लेकिन इन बहनों ने इस सोच को बदलने का प्रयास किया। उन्होंने साबित किया कि बेटियां भी परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभा सकती हैं। स्थानीय लोगों ने उनके साहस और निर्णय की सराहना की। यह घटना समाज में बेटियों की बदलती भूमिका को दर्शाती है। तीनों बहनों ने भावनात्मक माहौल में अपने पिता को अंतिम विदाई दी। उनके इस कदम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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