सिरसा जिले में उत्तर प्रदेश के एक मिसिंग बुजुर्ग को उसके परिजनों से मिलवाने का काम डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने किया है। बुजुर्ग से मिलकर परिजन खुश दिखे और सेवादारों की सेवा की सराहना की। परिजनों ने बताया कि बुजुर्ग अवधेश अपनी पत्नी की मौत के बाद परेशान रहने लगे थे और पिछले तीन माह से लापता थे। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी, ब्लॉक दारेवाला के सेवादारों ने तीन महीने से लापता बुजुर्ग अवधेश कुमार को उनके परिजनों से मिलवाया। बसंत सिंह इन्सां ने बताया कि अवधेश कुमार गांव गोरीवाला के पास खेत की मेढ़ पर मिले थे। गांव मोड़ी के सेवादार तेजा सिंह इन्सां ने उन्हें देखा और सेवादार दर्शन इन्सां को सूचना दी। इसके बाद सेवादार उन्हें एमएसजी डेरा सच्चा सौदा एवं मानवता भलाई केंद्र, अलखपुर धाम, अहमदपुर दारेवाला ले गए। वहां उनकी साफ-सफाई, भोजन और रहने का इंतजाम किया गया। सेवादारों ने उनके परिवार का पता लगाने की कोशिश शुरू की। बातचीत में बुजुर्ग ने अपना नाम अवधेश कुमार, पिता का नाम ननका और पता काराकांध धाता, जिला फतेहपुर, उत्तर प्रदेश बताया। सेवादारों ने पुलिस की मदद से उनके परिजनों से संपर्क किया। परिजनों को जानकारी मिलने के बाद उनके बेटे कुबेर और दामाद राकेश कुमार व आशीष कुमार देर रात अहमदपुर दारेवाला स्थित केंद्र पहुंचे और अवधेश कुमार को अपने साथ ले गए। परिजनों ने सेवादारों के प्रयासों की सराहना की। बुजुर्ग के बेटे कुबेर ने बताया कि उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। करीब तीन माह पहले वे उत्तर प्रदेश से लुधियाना स्थित अपने बेटे के पास आए हुए थे। इसी दौरान एक सुबह वे घर से बाहर निकले, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण लापता हो गए। परिवार ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इस दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन करके उन्हें अवधेश कुमार के जम्मू-कश्मीर में होने की सूचना दी और रुपये जमा करवाने की बात कही, लेकिन वहां पहुंचने पर फोन करने वाले ने अपना मोबाइल बंद कर लिया। कुबेर ने बताया कि जब इस बार उन्हें सूचना मिली कि उनके पिता सिरसा जिले के अहमदपुर दारेवाला में हैं तो शुरुआत में उन्हें विश्वास नहीं हुआ, लेकिन पिता को सुरक्षित देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बुजुर्ग के दामाद राकेश कुमार ने बताया कि उनकी सास के निधन के बाद अवधेश कुमार की मानसिक स्थिति प्रभावित हो गई थी और मानसिक परेशानी के चलते वे अक्सर घर से बाहर चले जाते थे। डेरा श्रद्धालुओं ने जिस निस्वार्थ भाव से उनके ससुर की देखभाल की, वह सराहनीय है।

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