रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी गई है। हालांकि, भारत के पास इस स्थिति में सतर्क लेकिन शांत रहने के कई कारण हैं। इससे पहले भी अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल के आयात को लेकर कदम उठाए थे। पिछले वर्ष वॉशिंगटन ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। बाद में फरवरी में इस फैसले को वापस ले लिया गया था। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल आयात करता है। सरकार अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रख रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को देखते हुए आगे की बातचीत अहम होगी। टैरिफ से जुड़े अंतिम फैसले और उसके प्रभाव पर नजर बनी हुई है। Source: Source Post navigation अमेरिकी जज ने ट्रंप प्रशासन की विदेशी शोधकर्ताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों पर वीजा पाबंदी रोकी