सुप्रीम कोर्ट ने 105 वर्षीय कैदी को जेल से स्थायी रिहाई देने का फैसला सुनाया है। अदालत ने यह राहत कैदी की अत्यधिक उम्र को ध्यान में रखते हुए दी। बुजुर्ग कैदी का जन्म वर्ष 1921 में हुआ था। उसे वर्ष 1994 के एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। लंबे समय से वह जेल में सजा काट रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए उसकी मौजूदा उम्र को महत्वपूर्ण आधार माना। अदालत के फैसले से बुजुर्ग कैदी को जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। यह मामला उम्रदराज कैदियों की सजा और मानवीय आधार पर राहत से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कैदी की उम्र को देखते हुए उसे राहत देने का निर्णय लिया। 105 वर्ष की उम्र में जेल से रिहाई का यह फैसला विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मामले में अदालत की मानवीय दृष्टि और परिस्थितियों के आधार पर राहत देने की भूमिका सामने आई है। Source: Source Post navigation यूपी से युवक की गिरफ्तारी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को जवाब के लिए दो सप्ताह का समय टेलीफोन पर गाली-गलौज और धमकी के आरोपों की FIR रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचे 76 वर्षीय बुजुर्ग