2012 में एक यात्री ने RAC टिकट के साथ ट्रेन में सफर किया था। बाद में उसके टिकट का स्टेटस बदलकर वेटलिस्टेड कर दिया गया। यात्री को टिकट की स्थिति में हुए इस बदलाव की जानकारी समय पर नहीं दी गई। उसे इस बदलाव का पता रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद चला। इसके कारण उसे ट्रेन में खड़े होकर यात्रा करनी पड़ी। मामले को लेकर यात्री ने शिकायत दर्ज कराई। उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे को सेवा में कमी का दोषी माना। आयोग ने यात्री को हुई मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया। फैसले में टिकट की स्थिति से जुड़ी जानकारी समय पर देने की जरूरत पर जोर दिया गया। यह मामला रेलवे की आरक्षण व्यवस्था में यात्रियों को सही और समय पर सूचना देने के महत्व को रेखांकित करता है। यात्री के अनुभव ने रेलवे सेवाओं में संचार व्यवस्था से जुड़ी कमियों को भी सामने रखा।

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