पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने करीब 22 साल पुराने दहेज मृत्यु मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए पति को राहत दी है। हाई कोर्ट ने पति की सात साल की सजा रद्द कर दी। अदालत के फैसले के बाद पति को मामले में बरी कर दिया गया। यह मामला करीब दो दशक से अधिक समय से न्यायिक प्रक्रिया में था। सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार किया गया। हाई कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निचली अदालत के फैसले की समीक्षा की। इसके बाद सात साल की सजा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। फैसले से आरोपी पति को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मामला लंबे समय तक अदालत में लंबित रहने के कारण भी महत्वपूर्ण रहा। हाई कोर्ट के इस निर्णय से दहेज मृत्यु मामलों में साक्ष्यों और न्यायिक मूल्यांकन के महत्व पर जोर पड़ा है। Source: Source Post navigation म्यूटेशन को लेकर PIL खारिज, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना 2012 में RAC टिकट पर ट्रेन में चढ़ा यात्री, वेटिंग के चलते करना पड़ा खड़े होकर सफर; रेलवे को देना पड़ा मुआवजा