सुप्रीम कोर्ट ने 81 वर्षीय मां को घर से कथित तौर पर निकालने से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों से जुड़े कानून के तहत बेटे की बेदखली का आदेश बहाल कर दिया। न्यायमूर्ति पामिडिघंतम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने माना था कि 2007 के कानून के तहत अधिकारियों के पास बेदखली का आदेश देने की शक्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण के लिए बनाए गए कानून के प्रावधानों पर विचार किया। मामला 81 वर्षीय मां की आवासीय सुरक्षा और बेटे की संपत्ति से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वरिष्ठ नागरिकों को कानून के तहत उपलब्ध संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता आई है। अदालत ने संबंधित प्राधिकरण द्वारा की गई बेदखली की कार्रवाई को फिर से प्रभावी कर दिया है। Source: Source Post navigation फर्जी ITC मामले में ED की 3 शहरों में छापेमारी, संदिग्ध लेनदेन और फंड लेयरिंग की जांच तेज सौरव दास का पता कथित तौर पर सार्वजनिक करने पर दिल्ली HC ने अय्यर-मित्र और मीडिया पोर्टलों को समन भेजा