कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 1960 के दशक में मुंबई के ब्रीच कैंडी क्लब से उन्हें ‘बाहर निकाले जाने’ का अनुभव याद किया। यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली जिमखाना क्लब पर सरकार के कब्जे की योजना को लेकर विवाद छिड़ा है। थरूर ने क्लब के उस नियम को नस्लवादी करार दिया जिसके तहत उन्हें हटाया गया था। यह बहस भारत के पुराने क्लबों में चली आ रही औपनिवेशिक विलासिता और बहिष्कार की प्रवृत्ति को उजागर करती है। केंद्र सरकार दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन रक्षा उद्देश्यों के लिए वापस लेना चाहती है। इस पूरे प्रकरण ने देश के इन तथाकथित प्रतिष्ठित क्लबों में आज भी जारी भेदभाव पर बहस छेड़ दी है। Source: Source Post navigation AIADMK विद्रोही विधायकों का यू-टर्न, EPS के नेतृत्व में एकजुट होने का भरोसा सीएम धामी ने ऊधमसिंह नगर में जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर सुनी समस्याएं, समाधान के दिए निर्देश