लेबनान इसराइल के साथ संघर्ष को कैसे समाप्त किया जाए, इस सवाल पर बंटा हुआ है। एक तरफ हिज़्बुलल्ला के सशस्त्र जवाब को समर्थन मिल रहा है, जहाँ कई लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का साधन मानते हैं और इजराइल के हमले के बाद प्रतिशोध की बात करते हैं। दूसरी ओर, कई राजनीतिक नेता और नागरिक जेरूसलम में वार्ता के जरिए शांति की आशा रखते हैं, मानते हैं कि सशस्त्र संघर्ष क्षेत्र को और बिगाड़ देगा। देश की आंतरिक राजनीतिक खाई, मौजूदा आर्थिक संकट और सामाजिक असंतोष इस बहस को और तीखा बना रहे हैं। आगामी कूटनीतिक वार्ता को लेकर दोनों पक्षों में आशा और भय दोनों ही मौजूद हैं, जिससे लेबनान की स्थिरता का भविष्य अनिश्चित बना रहा है। Post navigation अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर नारी सुरक्षा का आरोप, बोले: मुख्यमंत्री खुद नारी‑विरोधी दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने $21 मिलियन के करार पर पुलिस प्रमुख को निलंबित किया