दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में लगी आग ने 20 से अधिक लोगों की जान ले ली है। यह घटना शहर के शहरी गांवों और व्यावसायिक क्षेत्रों में लगातार बनी रहने वाली अग्नि सुरक्षा लापरवाही को उजागर करती है। संकरी गलियां, बिना अनुमति के हुए निर्माण और मिश्रित भूमि उपयोग के कारण ये क्षेत्र आपदा के लिए उपजाऊ बन जाते हैं। यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना भी मुश्किल होता है, जिससे रेस्क्यू में देरी होती है। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हर बड़ी आग के बाद कुछ दिनों तक हलचल होती है और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। कमर्शियल और आवासीय इलाकों में सुरक्षा मानकों का लगातार उल्लंघन हो रहा है। इस हादसे ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि नियमों का पालन न करना हर बार त्रासदी का कारण बनता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सिस्टम में सुधार नहीं होगा, ये घटनाएं रुकेंगी नहीं। Source: Source Post navigation भारत में गर्मी से हर साल हजारों मौतें, लेकिन आधिकारिक आंकड़े सच्चाई से कोसों दूर, अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा अरावली की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: जांच के लिए हाई-लेवल कमेटी का गठन, केंद्र की रिपोर्ट अधूरी