हरियाणा की क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) ने सरकार को अपनी पहली ऑडिट रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में विभिन्न विभागों की 64 सरकारी परियोजनाओं में गंभीर अनियमितताएं और गुणवत्ता संबंधी कमियां पाई गई हैं। अब निर्माण कार्यों में खामी मिलने पर केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि निगरानी करने वाले इंजीनियर भी जिम्मेदार माने जाएंगे। QAA ने स्पष्ट किया है कि गुणवत्ता ऑडिट अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने का प्रभावी माध्यम बनेगा। प्राधिकरण का गठन अप्रैल 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार ने किया था। इसका उद्देश्य सरकारी परियोजनाओं की स्वतंत्र तकनीकी जांच और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना था। सरकार को लगातार डीपीआर, डिजाइन, निर्माण और रखरखाव में खामियों की शिकायतें मिल रही थीं। QAA ने सभी विभागों के लिए मानकीकृत कार्यप्रणाली और गुणवत्ता मानदंड तैयार किए हैं। विभाग अब अपनी पसंद से सलाहकार नियुक्त नहीं कर सकेंगे और उन्हें QAA के पैनल से चयन करना होगा। कई परियोजनाओं में थर्ड पार्टी निरीक्षण और ऑडिट भी अनिवार्य कर दिया गया है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और एक ठेकेदार के खिलाफ रिकवरी प्रक्रिया शुरू हुई है। सरकार QAA को कानूनी अधिकार देने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। इससे भविष्य में गुणवत्ता संबंधी मामलों में प्राधिकरण की शक्तियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

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