कर्नाटक में प्रस्तावित 2,588 करोड़ रुपये के बिजली ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को लेकर विरोध शुरू हो गया है। KEB इंजीनियरों ने परियोजना की आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं। इंजीनियरों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट फिलहाल जरूरी नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे लंबे समय में उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। परियोजना का उद्देश्य दक्षिणी कर्नाटक के पावर ग्रिड को भविष्य की मांग के लिए मजबूत करना है। इंजीनियरों ने प्रस्तावित वार्षिक ट्रांसमिशन शुल्क को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता की मांग की है। संगठन ने नियामक आयोग से लाइसेंस आवेदन को खारिज करने की अपील की है। मामले में परियोजना के आर्थिक प्रभावों को लेकर चर्चा जारी है। अंतिम फैसला नियामक आयोग की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। Source: Source Post navigation फेरारी अमाल्फी स्पाइडर भारत में लॉन्च, 640 हॉर्सपावर इंजन और 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का दावा किफायती घरों की बढ़ी मांग से DDA की रिकॉर्ड कमाई, पहली तिमाही में 1,020 करोड़ रुपये की बिक्री