एक उपभोक्ता मामले में हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड को गलत वजन वाला डिटर्जेंट पाउच बेचने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। मामला वर्ष 2020 में शुरू हुआ, जब एक ग्राहक ने पैकेट का वजन तय मात्रा से कम पाया। उपभोक्ता ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। कंपनी ने मामले में जिला आयोग के फैसले को चुनौती दी थी। कंपनी ने आयोग के अधिकार क्षेत्र और जांच निष्कर्षों पर आपत्ति जताई थी। राज्य उपभोक्ता आयोग ने अनुचित व्यापार व्यवहार के निष्कर्ष को बरकरार रखा। हालांकि, आयोग ने पहले दिए गए मुआवजे की राशि को कम कर दिया। उपभोक्ता को अब 50 हजार रुपये का मुआवजा मिलने का फैसला हुआ है। आयोग ने माना कि लेबल पर दी गई मात्रा और वास्तविक उत्पाद में अंतर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। यह फैसला कंपनियों के लिए उत्पाद की सही जानकारी देने की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। उपभोक्ता मामलों में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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